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राहुल गांधी का हाइड्रोजन बॉम्ब फुस्स,  वोट चोरी के दावे हकीकत से परे

Rahul Gandhi's Vote Theft Claims Far from Reality

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के नतीजों का इस्तेमाल करके कांग्रेस नेता और नेता विपक्ष राहुल गांधी बिहार चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश में लगे हुए हैं। राहुल गांधी ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरियाणा चुनाव की “चोरी” बताते हुए कई उदाहरण पेश किए हैं। नाम दिया गया हाइड्रोजन बॉम्ब। हालांकि जितना भारी इसका नाम रखा गया उसके मुकाबले इसमें किए गए दावे खोखले, झूठे और संदेहास्पद रहे।

एक घर में 100 से ज्यादा वोटरों का दावा खोखला

राहुल गांधी ने दावा किया कि हरियाणा के पलवल जिले के होडल में एक घर पर 66 वोटर रजिस्टर्ड हैं, जबकि दूसरे पर 501 और सोनीपत जिले के राय विधानसभा क्षेत्र में एक ब्राजीलियाई महिला की फोटो का इस्तेमाल 22 बार 10 बूथों पर वोट डालने के लिए किया गया। ये दावे सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, लेकिन जमीन पर उतरकर जांच करने पर ये आरोप खोखले साबित हो रहे हैं।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक विस्तृत रिपोर्ट बताती है कि राहुल गांधी के दावे गलत हैं और वो पूरा सच सामने नहीं रख रहे हैं। राहुल गांधी का दावा है कि, “होडल विधानसभा में हमने पाया कि एक घर पर भाजपा जिला परिषद उपाध्यक्ष के नाम 66 वोटर रजिस्टर्ड हैं।” 

जबकि होडल के गुधराना गांव में हाउस नंबर 150 पर पहुंचने पर पता चला कि यह एक बड़ा प्लॉट है जो करीब 1 एकड़ में फैला है और यहां पर चार पीढ़ियों का परिवार रहता है। यह घर भाजपा जिला परिषद उपाध्यक्ष उमेश गुधराना (40) का है। उनके चाचा राजपाल गुधराना (60) और भाइयों ने बताया कि यह परिवार करीब 80 साल पहले पास के सिहा गांव से यहां आया था। शुरू में 10 एकड़ जमीन पर रहते थे, जहां से 5 एकड़ पर घर बने। 1986 में बना यह सबसे पुराना पक्का घर है, जिसका नंबर 150 है।

परिवार बढ़ने के साथ-साथ अलग-अलग घर बने, लेकिन सभी का पता एक ही हाउस नंबर 150। उमेश गुधराना कहते हैं, “हमारा परिवार चार पीढ़ियों का है। 2009 में मेरा वोटर आईडी बना, और जो भी सदस्य वोटर बनता है, BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) यही पता लिखता है। वोट चोरी का कोई सवाल ही नहीं।” परिवार के सदस्यों ने पुष्टि की कि सभी ने विधानसभा चुनाव में वोट डाला, और कोई अनियमितता नहीं हुई है।

यह स्थिति ग्रामीण भारत में आम है, जहां बड़े परिवार एक ही प्लॉट पर रहते हैं और पते साझा होते हैं। चुनाव आयोग के नियमों के तहत, वोटर लिस्ट में पता सटीक होना चाहिए, लेकिन ऐतिहासिक कारणों से एक ही नंबर कई घरों के लिए इस्तेमाल होता है। यहां 66 वोटरों में कोई फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि एकजुट परिवार की कहानी है।

राहुल गांधी का दूसरा दावा एक घर से जुड़ा है जहां पर 501 वोटर रजिस्टर्ड हैं लेकिन ये भी संदेहास्पद है क्योंकि जब मीडिया हाउस की टीम वहां पहुंची तो ये घर मिला ही नहीं। इसके स्थान पर यहां घर नंबर 265 का जिक्र था। लेकिन जांच में पता चला कि यह कोई एकल घर नहीं, बल्कि एक विशाल भूखंड है। इस पते पर रहने वाली किश्नी (72) ने बताया कि उनके परिवार में आठ सदस्य हैं। उनके पति राम सौरोट के परदादा के पास 25-30 एकड़ जमीन थी, जो धीरे-धीरे प्लॉटों में बंटी और बिकी। अब इस जमीन पर 200 घर और तीन प्राइवेट स्कूल हैं। सभी वोटरों का पता हाउस नंबर 265 ही दर्ज है।

राम के बेटे पवन (26) कहते हैं, “1980 से पहले यह खेती के लिए इस्तेमाल होती थी, लेकिन परिवार बढ़ने और जमीन बिकने से घर बने। छह पीढ़ियां यहीं रहती हैं, साथ ही जमीन खरीदने वाले लोग भी।” एक उदाहरण है श्यामवती सिंह (46), जो 2013 में यहां जमीन खरीदकर आईं। वे अपने पति और दो बच्चों के साथ रहती हैं और इसी पते से वोट डालती हैं।

यहां भी, वोट चोरी का कोई सबूत नहीं। बल्कि, यह ग्रामीण विकास की एक मिसाल है जहां एक पुरानी जमीन अब आधुनिक बस्ती बन चुकी है। होडल में कांग्रेस के उदय भान भाजपा के हरिंदर सिंह से 2,595 वोटों से हारे। हार को ‘चोरी’ बताना न केवल तथ्यों की अनदेखी है, बल्कि वोटरों के विश्वास को ठेस पहुंचाता है

ब्राजीलियाई मॉडल भी नहीं चली

अब आते हैं वायरल हो रही ब्राजील की मॉडल पर। सोनीपत के राय विधानसभा क्षेत्र में राहुल गांधी ने सबसे सनसनीखेज दावा किया कि “एक ब्राजीलियाई नागरिक की स्टॉक फोटो का इस्तेमाल 22 बार 10 बूथों पर वोट डालने के लिए किया गया, वो भी सीमा, स्वीटी, सरस्वती, रश्मि, विमला जैसे नाम बदल-बदलकर। 

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने चार महिलाओं तक पहुंचकर उनकी बात सुनी, जिनकी वोटर लिस्ट में यह फोटो थी। सभी ने बिना किसी समस्या के वोट डाला, और उन्हें इस ‘घोटाले’ की जानकारी गांधी के बयान से ही हुई। स्वीटी एक गृहिणी हैं। उन्होंने कहा, “इस बार वोट डालने में कोई दिक्कत नहीं हुई। मैंने अपना 2012 का वोटर कार्ड और दी गई पर्ची इस्तेमाल की।” लगभग सौ मीटर दूर मंजीत (24 साल) का घर है। उनके परिवार ने बताया कि वे भी हमेशा की तरह वोट डाल चुकी हैं।

सेक्टर 35 में दर्शना जून (54) रहती हैं, जो उन 22 महिलाओं में शामिल हैं। उनकी बेटी हर्षा (24) ने मां का 2019 का वोटर आईडी दिखाया, जिसमें सही फोटो है। हर्षा ने कहा, “हम सबने हाल ही में वोट डाला, कोई समस्या नहीं आई। वोटर लिस्ट में फोटो साफ तौर पर गलत है।”

इन तीन महिलाओं के अलावा, माचरौला गांव की पिंकी को वोटर आईडी में दिक्कत जरूर हुई, लेकिन उसका ब्राजीलियाई महिला से कोई लेना-देना नहीं। पिंकी ने बताया कि 2016 में शादी के बाद दिल्ली से यहां आईं। उन्हें जो वोटर कार्ड मिला, उसमें किसी और गांव वाली महिला की फोटो थी।

“मैंने कार्ड आशा वर्कर (बीएलओ) को वापस दे दिया और सही फोटो लगवाने को कहा, लेकिन नया कार्ड अभी तक नहीं मिला। मैंने दो बार वोटर्स स्लिप और आधार कार्ड से वोट डाला है,” पिंकी ने कहा। बूथ की बीएलओ बबीता ने बताया कि वे कुछ महीने पहले ही नियुक्त हुई हैं और इस मामले की जानकारी नहीं है। पुरानी बीएलओ (आशा वर्कर) सुशीला कहती हैं कि उन्हें नहीं पता कि ब्राजीलियाई महिला की फोटो वोटर लिस्ट में कैसे आई।

इन सभी दावों का कोई प्रमाण नहीं है इसके बाद भी राहुल गांधी इनके आधार पर चुनावों को रद्द करवाने की मंशा रखते हैं। राहुल गांधी का पैटर्न बन गया है कि वो चुनाव हारते हैं फिर हार के बाद वे वोट चोरी जैसे आरोप लगाते हैं। कमाल की बात ये है कि वे अदालतों और चुनाव आयोग की जांच के बावजूद झूठ बोलते रहते हैं और अपने दावों को बिना फैक्ट्स के सच मानकर चलते हैं। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बदनाम करके वे देश के युवाओं और नई पीढ़ी में अविश्वास पैदा कर रहे हैं। 

न्यायालय ने राहुल गांधी के राजनीतिक दावों को केवल राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है और चुनाव आयोग को स्पष्टीकरण जारी करने के लिए बाध्य करने का आधार नहीं माना। चुनाव आयोग ने भी फैक्ट चेक के बाद इन दावों को खारिज कर दिया, लेकिन राहुल गांधी लगातार इन तथ्यों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

वोटों के अंतर का गणित

आप हरियाणा की ही बात करें तो यहां पर कांग्रेस ने 8 सीटें बहुत छोटे अंतर से गंवाईं, जिसमें कुल 12,592 वोटों का अंतर था। उदाहरण के तौर पर:

– लोहारू: 792 वोट

– आदमपुर: 1,268 वोट

– रोहतक: 1,341 वोट

– साढौरा: 1,699 वोट

– पंचकूला: 1,997 वोट

– फतेहाबाद: 2,252 वोट

– थानेसर: 3,243 वोट

राहुल गांधी इन तथ्यों को जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे हैं, जो उनके दोहरे रवैये को दर्शाता है। कोई भी पार्टी छोटे अंतर से जीत या हार सकती है, लेकिन भाजपा ने इन 7 सीटों पर 12,592 वोटों के मामूली अंतर से जीत हासिल की।

हरियाणा के चुनाव परिणाम लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन राहुल गांधी इनसे नाखुश हैं। भाजपा ने 2024 लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत के लिए 32 सीटों की जरूरत थी, लेकिन 33,000 वोटों के छोटे अंतर से हारी। हिमाचल प्रदेश में भी 10 सीटों पर 12,036 वोटों के अंतर से हार के बावजूद भाजपा ने बहाने नहीं बनाए, जबकि कांग्रेस हर हार को वोट चोरी का नाम देती है।

एग्जिट पोल और पोस्टल बैलट का दावा

राहुल गांधी ने हरियाणा और महाराष्ट्र में एग्जिट पोल के आधार पर कांग्रेस की जीत का दावा किया, लेकिन भाजपा की जीत के बाद उन्होंने चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया। वहीं, झारखंड (2024) और हिमाचल प्रदेश (2022) में भाजपा के पक्ष में एग्जिट पोल होने के बावजूद कांग्रेस/सहयोगी दलों की जीत पर उन्होंने चुप्पी साध ली और चुनाव आयोग के खिलाफ सवाल नहीं उठाया। यह स्पष्ट दोहरेपन को दिखाता है।

हरियाणा में पोस्टल बैलट कुल जनसंख्या का केवल 0.57% थे। राहुल गांधी किस आधार पर दावा कर सकते हैं कि 0.57% वोट 99.43% पर हावी हो सकते हैं? 2015 के बिहार चुनावों में भी पोस्टल बैलट गिनती के दौरान भाजपा आगे थी, लेकिन महागठबंधन ने बड़े अंतर से जीत हासिल की। क्या यह भी वोट चोरी थी?

राहुल गांधी का दावा है कि “डुप्लिकेट” वोटरों ने भाजपा को जीत दिलाई। लेकिन सच्चाई यह है कि यह साबित करना असंभव है कि किसे फायदा हुआ। उदाहरण के तौर पर, लोहारू, थानेसर, पंचकूला जैसी सीटों पर कांग्रेस की जीत में भी “डुप्लिकेट” वोटरों का जिक्र नहीं किया गया। नूंह, पुन्हाना, और फरीदपुर झिरका जैसे कांग्रेस के गढ़ों में भी बड़े अंतर से जीत हुई, जहां “डुप्लिकेट” वोटरों का आरोप नहीं लगा।

कांग्रेस ने बूथ एजेंटों के जरिए कोई आपत्ति दर्ज नहीं की, और वोट गिनती के दौरान केवल 5 शिकायतें मिलीं। चुनाव आयोग ने 4.16 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों का सत्यापन किया, और 20,000 से अधिक बूथों पर 87,000 एजेंटों ने निगरानी की। फिर भी राहुल गांधी 25 लाख वोट चोरी का दावा कर रहे हैं, जो तथ्यों के खिलाफ है।

राहुल गांधी की भावनाएं तथ्य नहीं है

वोटर लिस्ट में सुधार एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन राहुल गांधी इसे बड़ा मुद्दा बनाकर अपनी हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ रहे हैं। हरियाणा में हार के बाद वे चुनाव आयोग पर दोषारोपण और युवाओं को उकसाने में लगे हैं। क्या यह समय नहीं है कि वे आत्ममंथन करें और लोकतंत्र को मजबूत करने की बजाय कमजोर करने की कोशिश छोड़ दें?

राहुल गांधी के ये दावे राजनीतिक रूप से प्रेरित लगते हैं, जो चुनावी हार को पचा न पाने का परिणाम हैं। जांच से साफ है कि होडल और राय के उदाहरण वोट चोरी के नहीं, बल्कि सिस्टम की सामान्य कमियों या ग्रामीण जीवन की वास्तविकताओं के हैं। वोटर लिस्ट में फोटो त्रुटियां होती रहती हैं, लेकिन इससे वोटिंग प्रभावित नहीं हुई।

ऐसी बयानबाजी न केवल चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है, बल्कि लाखों वोटरों – खासकर ग्रामीण महिलाओं और परिवारों – को अपमानित करती है। लोकतंत्र में हार-जीत स्वाभाविक है; इसे साजिश बताना खतरनाक है। विपक्ष को सुधार के लिए सुझाव देना चाहिए, न कि अफवाहें फैलाना।

हरियाणा के वोटरों ने भाजपा को फिर से चुना – यह जनादेश है, चोरी नहीं। क्या समय आ गया है कि राजनीतिक दल तथ्यों पर बहस करें, न कि भावनाओं पर। 

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