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कहाँ गए ज़ोहरान से तुम कहीं चले क्यों नहीं गए ज़ोहरान तक का सफ़र: एक भारतीय liberal की व्यथा

दोस्तों मैं हूँ liberandu, जैसा की आप सब जानते हैं, Middle East में गजब जंग चल रही है, अमरीका और इजराइल ईरान को फोड़ रहे हैं, और बदले में ईरान अमरीका के base फोड़ रही है उस क्षेत्र में. इस जंग के चक्कर में सऊदी अरब, संयुक्त अरब एमिरात, बहरीन, कुवैत, ओमान, क़तर, सब चपेट में आ चुके हैं. और इस जंग में हमारे liberal icon खमेनेई जी मारे गए हैं.

खमेनेई जी liberalism के representative थे, वो तो खुद liberalism थे , उन्हें मार कर इजराइल और अमरीका ने ठीक नहीं किया। हमारा तो दिल ही टूट गया.

और दिल ज़्यादा टूटा ज़ोहरान ममदानी के कमैंट्स से, भाई हमें तुम्हे अपना सोचा लेकिन तुम ईरान को ही गरियाने लग गए? दिल ही तोड़ दिया।

कभी हम पूछते थे ज़ोहरान कहाँ है, अब इसके ट्वीट के बाद पूछना पड़ रहा है की ज़ोहरान क्यों है. क्या गजब धोखा दिया इसने हमें

ममदानी के लिए हम किस किस से नहीं लड़े , मोदी से, अमित शाह से, और न जाने किस किस किस से, लेकिन when push came to shove , ममदानी तो neutral way में निकल लिए, हमें छोड़ के, दगाबाज़। क्या इसीलिए अरफ़ा ने तुम्हारी स्तुति की थी? यार comeon

ममदानी को शर्म आनी चाहिए, यहाँ अरफ़ा जी जी जान लगा रही हैं तुम्हे महान बताने के लिए, और वहां तुम ईरान पे हमले को सही बता रहे हो?
तुम्हे पता भी है की ईरान में जब खमेनेई की मौत पर parties हो रही हैं, भारत में शोक सभाएं हो रही हैं. मेरा तो दिल ही तोड़ दिया ममदानी ने, hope other liberals are doing better

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